13 राष्ट्रीय पदक जीतकर झारखंड की बेटी ने दिखाया नक्सलियों को आईना, अब कोलंबिया में परमच लहराने की तैयारी

13 राष्ट्रीय पदक जीतकर झारखंड की बेटी ने दिखाया नक्सलियों को आईना, अब कोलंबिया में परमच लहराने की तैयारी
उत्तम आनंद, गुमला: हौसले बुलंद हों तो जिंदगी की हर चुनौती आसान हो जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है झारखंड की बेटी सुप्रीति कच्छप की। गुमला की रहने वाली 19 वर्षीय सुप्रीति एथलीट है। सुप्रीति अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं और कई रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। फिलहाल सुकृति पटियाला में स्पोर्ट्स एकेडमी में हैं जहां वह कोलंबिया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं. तमाम सफलताओं के बावजूद नक्सल प्रभावित इलाके से ताल्लुक रखने वाली सुप्रीति और उनका परिवार गरीबी और अभाव से जूझ रहा है. सुप्रीति अंडर-20 एथलेटिक्स वर्ल्ड कप खेलने कोलंबिया जा रही हैं। सुप्रीति कच्छप और उनके संघर्ष की कहानी पढ़ें।

सुप्रीति कच्छप के संघर्ष की कहानी
झारखंड के गुमला में जन्मीं सुप्रीति के पिता का नाम रामसेवक उरांव और माता का नाम बालमती था. रामसेवक परिवार चलाने के लिए वैद्य का काम करता था। वह मरीजों को देखने के लिए आसपास के गांवों में जाते थे। साल 2003 में दिसंबर की रात रामसेवक घर नहीं लौटा। बालमती समेत पांच बच्चे अपने माता-पिता के लौटने का इंतजार करते रहे, लेकिन अगली सुबह रामसेवक और कुछ ग्रामीणों के शव मिले। नक्सलियों ने उसे गोलियों से छलनी कर पेड़ से लटका दिया था। पिता की मृत्यु के समय सुप्रीति बहुत छोटी थी। माँ ने सभी बच्चों को पाला। बालमती देवी को घाघरा प्रखंड के बीडीओ कार्यालय में नौकरी मिल गई. बच्चों के साथ रहने के लिए सरकारी क्वार्टर में एक आश्रय भी मिला। यहीं से सुप्रीति ने संघर्ष की ‘दौड़’ शुरू की।

दौड़ने में सुप्रीति का करियर
इंटर स्कूल प्रतियोगिता में सुप्रीति ने कोच प्रभात रंजन तिवारी से मुलाकात की। उन्होंने सुप्रीति को प्रशिक्षण देना शुरू किया और वर्ष 2015 में सुप्रीति झारखंड खेल प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण शुरू किया। इस दौरान सुप्रीति ने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्होंने 400 मीटर, 800 मीटर, 1500 मीटर और फिर 3000 मीटर की दौड़ में भी कई रिकॉर्ड बनाए।
ICSE 10th Board Result: झारखंड के वेदराज ने लहराया झंडा, बने ऑल इंडिया सेकेंड टॉपर…जानिए कितने नंबर मिले
संघर्ष का परिणाम राष्ट्रीय पदक के रूप में प्राप्त हुआ।
साल 2019 में सुप्रीति की मेहनत रंग लाई जब उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय पदक जीता। फिर नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीता। सुप्रीति ने साल 2021 में गुवाहाटी में हुई नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रिकॉर्ड समय में 3000 मीटर की दौड़ पूरी की। सुप्रीति को भरोसा है कि वह आगामी विश्व कप प्रतियोगिता में नए रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं।

रिपोर्ट – उत्तम आनंद

अगला लेखसावन सोमवार पहला सोमवार : 4 किमी तक लगी लाइन, सीसीटीवी से हो रही निगरानी, ​​पहले सोमवार को बाबाधाम में उमड़े श्रद्धालु

नवभारत टाइम्स न्यूज ऐप: देश और दुनिया की खबरें, आपके शहर की स्थिति, शिक्षा और व्यापार अपडेट, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल समाचार और धार्मिक कर्म… नवीनतम समाचार प्राप्त करें, एनबीटी ऐप डाउनलोड करें

वेब शीर्षक: एथलीट सुप्रीति की कहानी जिसने 13 मेडल जीते और अब कोलंबिया की तैयारी कर रही हैं
नवभारत टाइम्स, टीआईएल नेटवर्क से हिंदी समाचार

We will be happy to hear your thoughts

Hinterlasse einen Kommentar

JHARKHANDTIMESNOW.COM NIMMT AM ASSOCIATE-PROGRAMM VON AMAZON SERVICES LLC TEIL, EINEM PARTNER-WERBEPROGRAMM, DAS ENTWICKELT IST, UM DIE SITES MIT EINEM MITTEL ZU BIETEN WERBEGEBÜHREN IN UND IN VERBINDUNG MIT AMAZON.IT ZU VERDIENEN. AMAZON, DAS AMAZON-LOGO, AMAZONSUPPLY UND DAS AMAZONSUPPLY-LOGO SIND WARENZEICHEN VON AMAZON.IT, INC. ODER SEINE TOCHTERGESELLSCHAFTEN. ALS ASSOCIATE VON AMAZON VERDIENEN WIR PARTNERPROVISIONEN AUF BERECHTIGTE KÄUFE. DANKE, AMAZON, DASS SIE UNS HELFEN, UNSERE WEBSITEGEBÜHREN ZU BEZAHLEN! ALLE PRODUKTBILDER SIND EIGENTUM VON AMAZON.IT UND SEINEN VERKÄUFERN.
Jharkhand Times Now